काठमाडौँ । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) मासलाइनले नेपालका कम्युनिस्टले युवाविद्यार्थीसितको सम्बन्ध फेरि बलियो बनाउने अपेक्षा व्यक्त गरेको छ ।
महासचिव प्रदीपसिंह ठाकुरद्वारा सेप्टेम्बर १२, २०२५ (भदौ २६ गते) जारी प्रेसवक्तव्यमा सो धारणा व्यक्त गरिएको हो ।
वक्तव्यमा जेनजी आन्दोलन नेपालमा व्याप्त आर्थिक सङ्कटको परिणाम भएको र त्यसको सम्बन्ध सिधै साम्राज्यवादी भूमण्डलीकरणसँग जोडिएको उल्लेख छ । मासलाइनका अनुसार साम्राज्यवादी भूमण्डलीकरणकै कारण नेपालमा बेरोजगारी र भ्रष्टाचार चरमचुलीमा पुगेको बताइएको छ ।
वक्तव्यमा जेनजीको आन्दोलनमा घुसपैठ भएको धारणा व्यक्त गरिएको छ । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीका सभापति रवि लामिछानेलाई जेलबाट निकाल्ने कार्यको उदाहरण वक्तव्यमा प्रस्तुत गरिएको छ ।
नेपालका लोकतन्त्र र धर्मनिरपेक्षताप्रेमी जनताले देशलाई पश्चगमनतिर जान नदिने अपेक्षा गर्दै वक्तव्यमा विश्वास व्यक्त गरिएको छ, आफूले गरेको सङ्घर्षबाट प्राप्त लोकतान्त्रिक अधिकारको रक्षा गर्न जनता सक्षम हुनेछन् ।
वक्तव्यमा नेपालका कम्युनिस्ट पार्टीहरूले आफ्ना अनुभवको समीक्षा गर्दै आफ्ना कमजोरी हटाउने र पुनः अगाडि बढ्ने आशासमेत गरिएको छ ।
अङ्ग्रेजी र हिन्दी भाषामा जारी प्रेसवक्तव्यको हिन्दी रूपान्तरण यहाँ प्रस्तुत गरिएको छ :
नेपाल में हाल के घटनाक्रम पर भाकपा(माले) मास लाइन का बयान
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) मास लाइन का पोलिट ब्यूरो नेपाल में जेनरेशन जेड (जेन-जेड) द्वारा “भ्रष्टाचार और कुशासन खत्म करने” की मांग को लेकर शुरू किए गए आन्दोलन के साथ एकजुटता का इजहार करता है । हम नेपाल सरकार द्वारा आन्दोलन पर ढाए गए निष्ठुर दमन की निन्दा करते हैं । यह आन्दोलन देश में व्याप्त विकट आर्थिक संकट का परिणाम है जो सीधे तौर पर साम्राज्यवादी भूमण्डलीकरण का नतीजा है । इसने बेरोजगारी को चरम पर पहुंचा दिया है, भ्रष्टाचार को आसमान पर पहुंचा दिया है और भीषण गरीबी पैदा किया है।
ये सब नौजवानों के गुस्से के उबाल के पीछे अंदरुनी कारण हैं । श्रीलंका और बांग्लादेश की हाल की घटनाओं ने भी इसमें भूमिका निभाई है ।
भाकपा (माले) मास लाइन की पोलिट ब्यूरो जेन-जेड आन्दोलन के विकासक्रम पर गहरी चिन्ता व्यक्त करता है । जेन-जेड खुद को आन्दोलन से अलग करने के लिए बाध्य हुआ है क्योंकि उनके अपने शब्दों में “आन्दोलन का अपहरण कर लिया गया है” । इस “अपहरण” का सबसे ज्वलंत उदाहरण है राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चेयरमैन मिस्टर रबी लामिछामे को उनके समर्थकों द्वारा जेल तोड़कर “रिहा” करना । यह व्यक्ति को-ऑपरेटिव घोटाला केस में जेल में बंद था ।
इस प्रकार, नौजवानों का एक सच्चा विद्रोह, जिसने निर्मम राजकीय दमन सहा, जिसमें 30 प्रदर्शनकारी मारे गए और 1000 से अधिक घायल हुए, अब सीधे तौर पर राजशाही की पुनः स्थापना कर या नेपाल सेना की मदद से राजसत्ता में राजा-परस्त और घोर दक्षिणपंथी ताकतों को बैठाकर पीछे की ओर जाने के खतरे का सामना कर रहा है ।
भाकपा (माले) मास लाइन को पक्का यकीन है कि नेपाल की जनवाद-पसंद और धर्म निरपेक्ष जनता देशी और विदेशी प्रतिक्रियावादी ताकतों द्वारा नेपाल के मौजूदा समाज को पीछे की ओर ले जाने के हर प्रयास का प्रतिरोध करेगी तथा कठीनाई से हासिल लोकतांत्रिक उपलब्धियों की रक्षा करेगी और उसका विस्तार करेगी जिसे उन्होंने दशकों लम्बे देशव्यापी जुझारू संघर्षों से पाया है ।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) मास लाइन पूरी गंभीरता से यह उम्मीद करती है कि नेपाल की वामपंथी और जनवादी ताकतें अपने अनुभव का सार-संकलन करेंगी, अपनी कमजोरियों को दूर करेंगी, जनता के साथ, विशेष रूप से आज के नौजवानों और छात्रों के साथ अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करेंगी और नेपाल की जनता की सकारात्मक आकांक्षाओं को पूरा करेंगी । उनका सकारात्मक दिया में विकास भारत में राजा-परस्त आरएसएस-भाजपा का मुकाबला करने में हमारे लिए भी मददगार होगा।
प्रदीप सिंह ठाकुर महासचिव
भाकपा (माले) मास लाइन
कोलकाता
12-09-2025